राजस्थान हाईकोर्ट के अहम फैसले: रिटायर डॉक्टर की चार्जशीट पर रोक, आबकारी मामलों में जवाब तलब

11 साल बाद कार्रवाई पर कोर्ट सख्त, शराब लाइसेंस व एसआई भर्ती मामले में भी महत्वपूर्ण निर्देश

राजस्थान हाईकोर्ट के अहम फैसले: रिटायर डॉक्टर की चार्जशीट पर रोक, आबकारी मामलों में जवाब तलब

अनन्य सोच। Legal Update India: Rajasthan High Court ने विभिन्न मामलों में महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर सख्त रुख अपनाया है। (Court Decision) अदालत ने एक ओर रिटायर चिकित्सा अधिकारी को 11 साल बाद जारी चार्जशीट पर रोक लगाई, वहीं आबकारी मामलों में विस्तृत जानकारी मांगी और एसआई भर्ती प्रकरण में  (Supreme Court, Indian Judiciary) सुप्रीम कोर्ट में केविएट दायर होने की जानकारी सामने आई है।

(Law News) पहले मामले में, हाईकोर्ट की एकलपीठ ने वर्ष 2013 की मेडिकल रिपोर्ट को लेकर वर्ष 2024 में जारी की गई चार्जशीट पर रोक लगा दी। यह आदेश जस्टिस मुन्नूरी लक्ष्मण ने डॉ. अमर सिंह मीणा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। साथ ही मुख्य चिकित्सा सचिव और कार्मिक सचिव को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।

याचिकाकर्ता के अनुसार, वर्ष 2013 में करौली के हिंडौन में मुख्य चिकित्सा अधिकारी रहते हुए उन्होंने एक घायल का मेडिकल परीक्षण कर 9 चोटें दर्ज की थीं, जबकि बाद में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 29 चोटें सामने आईं। इस आधार पर विभाग ने लापरवाही का आरोप लगाया। हालांकि, याचिका में कहा गया कि सेवानिवृत्ति के वर्षों बाद कार्रवाई करना पेंशन नियम, 1996 के विपरीत है। अदालत ने prima facie इसे गंभीर मानते हुए चार्जशीट पर रोक लगा दी।

दूसरे मामले में, हाईकोर्ट ने जिला आबकारी अधिकारी को निर्देश दिया कि वर्ष 2025-26 में दर्ज एफआईआर का पूरा विवरण दो सप्ताह में पेश किया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा कि इनमें से कितने मामलों में लाइसेंस रद्द किए गए। अदालत ने गोविन्द शर्मा को राहत देते हुए उनके लाइसेंस नवीनीकरण पर लगी रोक को स्थगित कर आगामी आदेशों तक दुकान संचालन की अनुमति दे दी।

याचिका में बताया गया कि याचिकाकर्ता का लाइसेंस 2025 से 2029 तक वैध था, जिसे एक एफआईआर के आधार पर रद्द कर दिया गया था, जबकि उसी आदेश पर पहले ही अदालत रोक लगा चुकी थी। इस पर कोर्ट ने विभाग से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा।

(SI Recruitment 2021) वहीं, एसआई भर्ती-2021 मामले में याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में केविएट दायर की है, ताकि राज्य सरकार द्वारा संभावित एसएलपी दाखिल करने की स्थिति में उनका पक्ष भी सुना जा सके। उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने पेपर लीक और अनियमितताओं के आधार पर 859 पदों की भर्ती को रद्द किया था।