द बैटल ऑफ नरनौल’ पर लेखक सत्र: 1857 की वीरगाथा और राव तुला राम की विरासत पर हुआ गहन मंथन
सिटी डेस्क।
Ananya soch: The Battle of Narnaul book
अनन्य सोच। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की सबसे भीषण और कम चर्चित लड़ाइयों में से एक पर आधारित पुस्तक The Battle of Narnaul को लेकर आयोजित विशेष लेखक सत्र में इतिहास की अनकही वीरगाथाओं पर गहन चर्चा हुई। कार्यक्रम का आयोजन 2 Pages Book Club द्वारा पेंगुइन रैंडम हाउस और क्लॉक टावर के सहयोग से किया गया। इस अवसर पर पुस्तक के लेखक Kulpreet Yadav और सह-लेखक Madhur Rao ने अपने शोध और अनुभव साझा किए।
सत्र में महान स्वतंत्रता सेनानी Rao Tula Ram की वीरता, नेतृत्व और रणनीतिक कौशल पर विस्तार से चर्चा हुई। लेखकों ने बताया कि यह पुस्तक Indian Rebellion of 1857 की एक महत्वपूर्ण लड़ाई—नरनौल—की कहानी को सामने लाती है, जिसे इतिहास में अपेक्षित पहचान नहीं मिल पाई।
कार्यक्रम में राव तुला राम के पर-परपोते Rao Raghvendra Singh भी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि राव तुला राम केवल एक वीर योद्धा ही नहीं, बल्कि दूरदर्शी रणनीतिकार भी थे, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष के लिए संसाधन जुटाए और विभिन्न राज्यों के साथ गुप्त गठबंधन बनाए।
लेखक कुलप्रीत यादव, जिन्होंने भारतीय तटरक्षक बल में लगभग 20 वर्षों तक सेवा दी, ने बताया कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने इतिहास आधारित लेखन को अपना पूर्ण समय दिया और अब तक 18 पुस्तकें लिख चुके हैं। उन्होंने बताया कि राव तुला राम ने ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ समर्थन जुटाने के लिए फारस, अफगानिस्तान और रूस तक संपर्क साधने की कोशिश की थी।
सह-लेखक मधुर राव ने कहा कि ऐसी किताबें इतिहास के उन अध्यायों को सामने लाती हैं जो समय के साथ भुला दिए गए। उन्होंने सुझाव दिया कि इन शूरवीरों की गाथाओं को शिक्षा, फिल्मों और नाटकों के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाना चाहिए।