जंगल में संघर्ष की दुखद कहानी: क्षेत्रीय लड़ाई में बाघ T-2402 की मौत
फलोदी रेंज के हिंदवार क्षेत्र में पहाड़ी पर मिला 4.5 वर्षीय नर बाघ का शव, टेरिटोरियल फाइट की आशंका
अनन्य सोच। राजस्थान के फलोदी रेंज के हिंदवार क्षेत्र में मंगलवार को एक दुखद घटना सामने आई, जहां बाघ T-2402 का शव घने वन क्षेत्र की पहाड़ी पर मिला। करीब साढ़े चार वर्ष का यह नर बाघ बाघिन T-99 का शावक था और वन विभाग की निगरानी में था।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस बाघ की गतिविधियों पर पहले से नजर रखी जा रही थी, क्योंकि उसके क्षेत्र में एक अन्य वयस्क नर बाघ की सक्रियता के संकेत मिल रहे थे। इसी को देखते हुए विभाग द्वारा लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा था।
डीसीएफ मानस सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला दो नर बाघों के बीच क्षेत्रीय संघर्ष (टेरिटोरियल फाइट) का प्रतीत हो रहा है। वन्यजीवों में इस प्रकार की लड़ाई स्वाभाविक होती है, लेकिन कई बार यह जानलेवा साबित हो जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जंगल में अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए नर बाघ अक्सर एक-दूसरे से भिड़ते हैं। यह संघर्ष क्षेत्र और संसाधनों पर अधिकार को लेकर होता है। ऐसे मामलों में कमजोर या कम उम्र के बाघ को अपनी जान गंवानी पड़ती है।
वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग का कहना है कि विस्तृत रिपोर्ट के बाद ही मौत के सटीक कारणों की पुष्टि हो सकेगी।
इस घटना ने वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। हालांकि यह प्राकृतिक व्यवहार का हिस्सा है, फिर भी विशेषज्ञ मानते हैं कि बाघों के सुरक्षित आवास और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र के लिए निरंतर निगरानी और संरक्षण आवश्यक है।