CM भजनलाल शर्मा की ‘राज-ममता’ पहल से हर जिले तक पहुंचेगी राहत

जयपुर में बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, जिला स्तर पर मेंटल हेल्थ केयर सेल्स की स्थापना ‘टेली-मानस’ से 71 हजार से अधिक लोगों को मिला परामर्श, युवाओं पर विशेष फोकस

CM भजनलाल शर्मा की ‘राज-ममता’ पहल से हर जिले तक पहुंचेगी राहत

अनन्य सोच। मुख्यमंत्री Bhajanlal Sharma के नेतृत्व में राज्य सरकार मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए एक ऐतिहासिक पहल ‘राज-ममता’ (Raj Mamata Program)(राजस्थान मेंटल अवेयरनेस, मॉनिटरिंग एंड ट्रीटमेंट फॉर ऑल) कार्यक्रम को लागू करने जा रही है। ‘विकसित राजस्थान-2047’ के विजन के तहत शुरू की गई यह पहल प्रदेशवासियों के मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वर्ष 2026-27 के बजट में घोषित इस कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन की तैयारियां विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर शुरू कर दी गई हैं।

(Mental Health Initiative) सरकार का उद्देश्य है कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं हर व्यक्ति तक सहज और सुलभ रूप में पहुंचे। इसी क्रम में जयपुर में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन मेंटल हेल्थ’ की स्थापना की जा रही है, जहां अत्याधुनिक काउंसलिंग, टेली-मेडिसिन और विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध होंगी। यह केंद्र दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए भी विशेषज्ञ परामर्श की सुविधा सुनिश्चित करेगा।

इसके साथ ही, प्रदेश के प्रत्येक जिला मुख्यालय पर ‘मेंटल हेल्थ केयर सेल्स’ स्थापित किए जाएंगे। इन सेल्स के माध्यम से नागरिकों को अपने जिले में ही मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का समाधान, उपचार और पुनर्वास सेवाएं मिल सकेंगी। यह पहल ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोगों को लाभान्वित करेगी।

(Tele Manas) मानसिक तनाव और अवसाद से जूझ रहे लोगों के लिए केंद्र सरकार द्वारा संचालित नेशनल टेली मेंटल हेल्थ प्रोग्राम ‘टेली-मानस’ भी प्रदेश में प्रभावी रूप से संचालित हो रहा है। (Healthcare Policy) 15 अप्रैल 2026 तक राजस्थान में 71 हजार से अधिक लोगों ने 14416 और 18008914416 टोल-फ्री नंबरों के माध्यम से परामर्श प्राप्त किया है। जयपुर में मई 2023 और जोधपुर में नवंबर 2023 से यह सेवा लगातार लोगों को त्वरित सहायता प्रदान कर रही है।

(Youth Counseling) युवाओं में बढ़ते तनाव और आत्महत्या जैसी प्रवृत्तियों को ध्यान में रखते हुए ‘राज-ममता’ कार्यक्रम के अंतर्गत शिक्षण संस्थानों में विशेष काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जाएंगे। साथ ही, जमीनी स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य मित्रों और आशा सहयोगिनियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि प्रारंभिक स्तर पर ही मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान कर समय रहते उपचार सुनिश्चित किया जा सके।