CBSE का बड़ा फैसला: कक्षा 6 से तीसरी भाषा अनिवार्य

स्कूलों को 7 दिनों में लागू करने के सख्त निर्देश

CBSE का बड़ा फैसला: कक्षा 6 से तीसरी भाषा अनिवार्य

अनन्य सोच। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 6 में तीसरी भाषा (R3) को अनिवार्य कर दिया है। 9 अप्रैल 2026 को जारी सर्कुलर में बोर्ड ने इसे “तत्काल और अनिवार्य” बताते हुए सभी संबद्ध स्कूलों को 7 दिनों के भीतर लागू करने के निर्देश दिए हैं।

जिन स्कूलों में अभी तक तीसरी भाषा की शुरुआत नहीं हुई है, उन्हें सर्कुलर जारी होने की तिथि से एक सप्ताह के भीतर इसे लागू करना होगा। यदि निर्धारित पुस्तकें उपलब्ध नहीं हैं, तो स्कूल स्थानीय सामग्री या वैकल्पिक पुस्तकों के माध्यम से पढ़ाई शुरू कर सकते हैं।

NEP 2020 और NCF-SE 2023 के अनुरूप निर्णय

यह निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 (NCF-SE 2023) के तहत तीन-भाषा फॉर्मूले को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके तहत छात्रों को कम से कम दो भारतीय भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा, जबकि तीसरी भाषा (R3) पहली (R1) और दूसरी (R2) भाषा से अलग होगी।

इस पहल का उद्देश्य छात्रों में भाषाई विविधता, समझ और दक्षता को बढ़ाना है।

स्कूलों पर जिम्मेदारी और निगरानी व्यवस्था

CBSE ने अपने क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे स्कूलों से R3 के रूप में पढ़ाई जाने वाली भाषाओं की जानकारी एकत्र करें और इसके प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी करें। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी स्कूल निर्धारित समय सीमा में नियमों का पालन करें।

हालांकि विदेश से लौटे कुछ छात्रों को सीमित छूट दी जा सकती है, लेकिन सामान्य रूप से यह नियम सभी छात्रों पर लागू होगा।

भविष्य में कक्षा 9-10 तक विस्तार

बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था आगे चलकर कक्षा 9 और 10 में भी लागू की जाएगी, लेकिन इसकी शुरुआत कक्षा 6 से की जा रही है। स्कूलों ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं और आगामी सत्र से छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी।

अधिक जानकारी के लिए छात्र और अभिभावक अपने-अपने स्कूल या CBSE की आधिकारिक वेबसाइट से संपर्क कर सकते हैं।