जब खामोश पत्थरों ने कह दी दिल की दास्तां: पेबल आर्ट में जिंदा हुईं भावनाएं, जयपुर में सजी अद्भुत प्रदर्शनी

हवा महल में राजकुमार गुप्ता की अनोखी कला—साधारण पत्थरों में दिखी प्रेम, ममता और जीवन की गहराई। नदी के किनारे बिखरे साधारण पत्थर… जिन पर शायद ही कभी हमारी नजर ठहरती हो, वही पत्थर जब एक कलाकार की संवेदनशील दृष्टि से गुजरते हैं, तो वे भावनाओं की जीवंत कहानी बन जाते हैं। रंगों और कल्पनाओं की इसी जादुई दुनिया में ले जाती है राजकुमार गुप्ता की पेबल आर्ट प्रदर्शनी, जहां हर पत्थर जैसे अपनी दास्तां खुद सुनाता नजर आता है।

जब खामोश पत्थरों ने कह दी दिल की दास्तां: पेबल आर्ट में जिंदा हुईं भावनाएं, जयपुर में सजी अद्भुत प्रदर्शनी

अनन्य सोच। हवा महल स्थित एग्जीबिशन हॉल में आयोजित इस दो दिवसीय प्रदर्शनी में कलाकार ने साधारण पत्थरों को अद्भुत कलाकृतियों में बदलकर कला प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया है। सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में 40 से अधिक पेबल आर्ट वर्क्स प्रदर्शित किए गए हैं, जो अपनी बारीकी और भावनात्मक गहराई के कारण खास आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

विधिक पेशे से जुड़े राजकुमार गुप्ता पिछले कई वर्षों से पेबल आर्ट को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बना चुके हैं। उनका मानना है कि हर पत्थर प्रकृति की गोद में एक अनकही कहानी, भावना और रंग समेटे होता है। वे कहते हैं, “हर पत्थर के भीतर एक छुपी हुई भावना होती है, मैं बस उसे रंगों के जरिए सामने लाता हूं।

पत्थरों में उकेरी संवेदनाओं की दुनिया

प्रदर्शनी में मां-बेटे के अटूट रिश्ते, प्रेम के इजहार और जीवन की जटिलताओं को बेहद खूबसूरती से दर्शाया गया है। खासकर मां की गोद में बच्चे की मासूमियत को दर्शाती कलाकृति इतनी जीवंत है कि दर्शकों की आंखें नम हो जाती हैं। वहीं प्रेम पर आधारित रचना सदियों पुरानी प्रेम कहानियों की याद दिलाती है।

 हर आर्टवर्क में छिपी है एक कहानी
इन कलाकृतियों की सबसे खास बात यह है कि पहली नजर में यह यकीन करना मुश्किल हो जाता है कि ये केवल पत्थर हैं। हर आर्टवर्क में कलाकार की सूक्ष्म दृष्टि और भावनात्मक जुड़ाव साफ झलकता है, जो दर्शकों को कुछ पल के लिए ठहरने और सोचने पर मजबूर कर देता है।

हाल ही में मार्च 2026 में नोएडा में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में भी राजकुमार गुप्ता की पेबल आर्ट ने देश-विदेश के कलाकारों और दर्शकों को प्रभावित किया था। अब जयपुर में हवा महल जैसे ऐतिहासिक स्थल पर यह प्रदर्शनी न केवल कला प्रेमियों बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक अनूठा अनुभव बन गई है।

यह प्रदर्शनी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि रचनात्मकता और संवेदनशील दृष्टि के साथ साधारण चीजों को भी असाधारण बनाया जा सकता है।