सुरों, ग़ज़लों और सूफियाना एहसासों से महकी ‘सुमिरन’ की सांस्कृतिक शाम
संगीत की मधुर लहरियों ने दर्शकों को किया भावविभोर
अनन्य सोच। जवाहर कला केंद्र की ओर से आयोजित “सुमिरन” कार्यक्रम संगीत और संस्कृति का अद्भुत संगम बनकर उभरा। सुरों, ग़ज़लों और भावनात्मक प्रस्तुतियों से सजी इस संध्या ने संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में प्रस्तुत कालजयी रचनाओं ने पूरे वातावरण को संगीत की मधुरता और सांस्कृतिक ऊर्जा से भर दिया।
हीरेन्द्र कुमार भट्ट की ग़ज़लों ने बांधा समां
कार्यक्रम की शुरुआत प्रदेश के उदीयमान कलाकार हीरेन्द्र कुमार भट्ट एवं उनके समूह की प्रस्तुति से हुई। उन्होंने सदाबहार ग़ज़ल “तुमको देखा तो ये ख़याल आया” से महफिल का आगाज़ किया, जिसने श्रोताओं को भावनाओं के सागर में डुबो दिया। इसके बाद “ये दौलत भी ले लो” की प्रस्तुति ने दर्शकों की भरपूर सराहना बटोरी।
हीरेन्द्र कुमार भट्ट द्वारा संयोजित रचना “बना बना के तमन्ना” ने कार्यक्रम में नया रंग भर दिया। वहीं महान गायिका Asha Bhosle को दी गई संगीतमय श्रद्धांजलि कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण बन गई। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को भावुक कर दिया और सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
संगत कलाकारों में वायलिन पर गुलज़ार हुसैन, कीबोर्ड पर अशफाक हुसैन, गिटार पर बिलाल हुसैन, ऑक्टोपैड पर फरीद खान और तबले पर मेहराज हुसैन ने शानदार संगत देकर प्रस्तुतियों को और प्रभावशाली बनाया।
टैगोर जयंती पर गूंजे कालजयी गीत और ग़ज़लें
कार्यक्रम के दूसरे चरण में यशराज गन्धर्व एवं उनके समूह ने Rabindranath Tagore की जयंती पर विशेष प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का शुभारम्भ गुरुदेव की अमर रचना “एकला चालो रे” से हुआ, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया।
इसके बाद “रंजिश ही सही”, “चुपके चुपके”, “गुलों में रंग भरे”, “दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है”, “मैं ख़याल हूँ किसी और का” और “तू ही रे” जैसी कालजयी रचनाओं की प्रस्तुति ने संगीत प्रेमियों का दिल जीत लिया।
तबले पर निर्मल जी, कीबोर्ड पर सत्यजीत संजू तथा हारमोनियम और मुख्य गायन पर स्वयं यशराज गन्धर्व की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित दर्शकों ने कलाकारों की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए इस सांस्कृतिक संध्या को यादगार और अविस्मरणीय बताया।