राजस्थान से पहला प्रेम और साड़ी की वैश्विक पहचान: लक्ष्मीपुरी का आत्मीय संवाद

राजस्थान से पहला प्रेम और साड़ी की वैश्विक पहचान: लक्ष्मीपुरी का आत्मीय संवाद

Ananya soch

अनन्य सोच। लेखिका और पूर्व राजनयिक लक्ष्मीपुरी ने राजस्थान से अपने गहरे और भावनात्मक जुड़ाव को साझा करते हुए कहा कि उनका इस प्रदेश से रिश्ता केवल यात्राओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह समय के साथ जीवन और सोच का हिस्सा बन गया. उन्होंने बताया कि वे पहली बार 18 वर्ष की आयु में कॉलेज के ऐतिहासिक शैक्षणिक भ्रमण के दौरान राजस्थान आई थीं. उस यात्रा में चित्तौड़, जयपुर, जोधपुर और अजमेर शामिल थे। उसी यात्रा में उन्हें राजस्थान से प्रेम हो गया, जो आज तक बना हुआ है. 

उन्होंने कहा कि बाद में उनकी बहन की शादी एक राजस्थानी परिवार में होने के बाद राजस्थान आना-जाना और भी बढ़ गया. विदेश सेवा में रहने के बावजूद जब भी भारत लौटतीं, राजस्थान आना निश्चित रहता. वे अपनी बेटियों को भी साथ लाती रहीं, जो यहाँ की संस्कृति, रंगों और परंपराओं से अत्यंत प्रभावित हुईं. 

लक्ष्मीपुरी ने राजस्थान की संस्कृति, विरासत, शिल्पकला, कुंदन आभूषण और साड़ियों की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा कि कुंदन के गहने और पारंपरिक साड़ियाँ उनके निजी जीवन का हिस्सा बन चुकी हैं. राजस्थान की पारंपरिक शैलियाँ उन्हें न केवल आकर्षित करती हैं, बल्कि पहचान भी देती हैं. 

अपनी पुस्तक के विषय चयन पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि यह विचार प्रकाशक की ओर से आया. “एसेंशियल इंडिया” शृंखला के अंतर्गत राष्ट्रीय प्रतीकों पर आधारित पुस्तकों के क्रम में साड़ी पर पुस्तक का प्रस्ताव रखा गया, क्योंकि साड़ी भारत की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न अंग है. 

उन्होंने कहा कि साड़ी उनके लिए केवल वस्त्र नहीं, बल्कि आशा, आकांक्षा और जीवन के संघर्षों का प्रतीक है. साहित्य, सिनेमा और लोकप्रिय संस्कृति में साड़ी की गहरी प्रतीकात्मकता दिखाई देती है, जिसे उन्होंने पुस्तक में समाहित करने का प्रयास किया है. “मॉलीवुड इफेक्ट” के माध्यम से साड़ी की छवि ने नई पीढ़ी को भी आकर्षित किया है. 

जेन जी की सोच पर टिप्पणी करते हुए लक्ष्मीपुरी ने कहा कि पहले साड़ी को पिछड़ेपन या असुविधा से जोड़ा जाता था, खासकर बड़े शहरों में, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. आज कई युवा साड़ी को कूल और स्टाइल स्टेटमेंट के रूप में देख रहे हैं. 

संयुक्त राष्ट्र के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि पहले और अब की चुनौतियाँ अलग हैं. वर्तमान में यूएन की स्थिति चिंताजनक है, फंडिंग में कटौती हुई है और कई देश अपेक्षित सहयोग नहीं कर रहे. उन्होंने कहा कि भारत यूएन का समर्थन करता है और सभी देशों को मिलकर इस वैश्विक संकट से बाहर निकलने के लिए प्रयास करने चाहिए.