VenezuelaNews: सनसनीखेज मोड़ पर वेनेजुएला: अमेरिकी बमबारी, मादुरो गिरफ्तार, सत्ता का खेल पलटा
Ananya soch: MaduroArrested
अनन्य सोच। VenezuelaCrisis: (VenezuelaNews) वेनेजुएला में 3 जनवरी 2026 को ऐसा तूफान उठा, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया. कभी लैटिन अमेरिका की सबसे समृद्ध अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाने वाला यह देश अब इतिहास की सबसे बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल का गवाह बन गया. (USMilitaryAction) अमेरिकी सेना ने (OperationAbsoluteResolve) ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ के तहत बड़े पैमाने पर हवाई हमले करते हुए राजधानी काराकास समेत कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. इस कार्रवाई में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो (NicolasMaduro) और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर अमेरिका ले जाया गया.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (DonaldTrump) ने चौंकाने वाला ऐलान करते हुए कहा कि अमेरिका अस्थायी रूप से (USVenezuela) का प्रशासन संभालेगा और तेल उद्योग को दोबारा पटरी पर लाने के लिए अमेरिकी कंपनियों को निवेश का अवसर देगा. इसे वेनेजुएला के वर्षों से चले आ रहे राजनीतिक और आर्थिक संकट का चरम बिंदु माना जा रहा है.
असल में संकट की जड़ 2013 में हुगो शावेज की मृत्यु के बाद पड़ी, जब निकोलस मादुरो सत्ता में आए. तेल पर निर्भर अर्थव्यवस्था भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बोझ तले दबती चली गई. नतीजा यह हुआ कि देश की जीडीपी करीब 80 प्रतिशत तक गिर गई. हाइपर-इन्फ्लेशन ने मुद्रा की कमर तोड़ दी और हालात ऐसे बने कि लगभग 78 लाख नागरिक देश छोड़ने को मजबूर हो गए.
2024 के विवादास्पद चुनावों के बाद हालात और बिगड़े. 2025 में अमेरिका ने मादुरो पर नार्को-टेररिज्म के आरोप लगाए और सैन्य दबाव बढ़ाया. दिसंबर तक तेल टैंकरों की जब्ती और ड्रग बोट्स पर हमले होते रहे. अंततः 2026 की शुरुआत में यह टकराव खुली सैन्य कार्रवाई में बदल गया. मादुरो को न्यूयॉर्क ले जाया गया है, जहां उन पर ड्रग्स और हथियार तस्करी के मामलों में मुकदमा चलेगा.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस कार्रवाई को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. संयुक्त राष्ट्र ने इसे खतरनाक मिसाल बताया, जबकि रूस, चीन और कई लैटिन अमेरिकी देशों ने अमेरिकी कदम की कड़ी निंदा की है. वहीं कुछ विपक्षी और अमेरिकी समर्थक इसे तानाशाही के अंत की शुरुआत मान रहे हैं.
दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले वेनेजुएला का भविष्य अब अनिश्चित नजर आ रहा है. सवाल यही है कि क्या देश में लोकतंत्र बहाल होगा या एक नया संघर्ष जन्म लेगा. आम नागरिकों के लिए उम्मीद की किरण जरूर जगी है, लेकिन शांति की राह अभी दूर दिखाई देती है.
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