जयपुर में RTO की रेस: RTO द्वितीय नंबर-1, RTO प्रथम फिसला—राजस्व रैंकिंग ने खोली असमानता की तस्वीर

9600 करोड़ लक्ष्य के मुकाबले 8325 करोड़ वसूली; RTO द्वितीय ने 99.41% के साथ मारी बाजी, RTO प्रथम सबसे पीछे

जयपुर में RTO की रेस: RTO द्वितीय नंबर-1, RTO प्रथम फिसला—राजस्व रैंकिंग ने खोली असमानता की तस्वीर

अनन्य सोच। परिवहन मुख्यालय द्वारा जारी ताजा राजस्व रैंकिंग में जयपुर के दोनों आरटीओ के प्रदर्शन में बड़ा अंतर सामने आया है। वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित 9600 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले विभाग ने कुल 8325 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया, जो 86.72 प्रतिशत है।

इस रैंकिंग में जयपुर RTO द्वितीय ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 99.41 प्रतिशत राजस्व हासिल कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया। वहीं, जयपुर RTO प्रथम मात्र 80.15 प्रतिशत के साथ सूची में सबसे पीछे रहा, जिससे विभागीय स्तर पर क्षेत्रीय असमानता स्पष्ट हुई है।

अन्य जिलों का प्रदर्शन
प्रदेश में अजमेर 93.69 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि दौसा 91.32 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर रहा। बीकानेर (88.76%), चित्तौड़गढ़ (86.64%), जोधपुर (86.50%) और सीकर (86.17%) ने क्रमशः चौथे से सातवें स्थान पर जगह बनाई। उदयपुर (84.35%), भरतपुर (82.50%), कोटा (82.36%), पाली (81.92%) और अलवर (81.17%) भी सूची में शामिल रहे।

RTO प्रथम में प्रोत्साहन की नई पहल
कमजोर प्रदर्शन के बावजूद जयपुर RTO प्रथम में कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के प्रयास जारी हैं। मार्च माह में सर्वाधिक राजस्व अर्जित करने वाले एमवीआई अतुल कटियार को “स्टार ऑफ द मंथ” अवॉर्ड दिया गया। वहीं एमवीआई विनीता चतुर्वेदी को फरवरी में सर्वाधिक सीएफ प्राप्त करने पर सम्मानित किया गया।

यह पहल RTO राजेंद्र सिंह शेखावत के कार्यकाल में शुरू हुई, जिसका सकारात्मक असर दिख रहा है। कार्यालय ने 60 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड सीएफ अर्जित किया और सीएफ व ओटीटी वृद्धि में राज्य में अग्रणी रहा।