Mumbai BMC Elections 2026: महायुति की ऐतिहासिक जीत, 25 साल बाद BJP का BMC पर कब्जा
भारत की सबसे अमीर महानगरपालिका में सत्ता परिवर्तन, ठाकरे परिवार की राजनीतिक विरासत को बड़ा झटका
Ananya soch: Mumbai BMC Elections 2026
अनन्य सोच। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव 2026 के नतीजों ने महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया है। 15 जनवरी को हुए मतदान के बाद गुरुवार को घोषित नतीजों में महायुति गठबंधन—भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना—ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया. यह जीत न केवल देश की सबसे समृद्ध नगर निगम पर नियंत्रण का प्रतीक है, बल्कि पिछले 25 वर्षों से BMC पर काबिज शिवसेना (ठाकरे गुट) के वर्चस्व के अंत का संकेत भी है.
सीटों का गणित और मतदान का आंकड़ा
BMC के कुल 227 वार्डों के लिए हुए चुनाव में 52.94 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो 2017 के चुनाव की तुलना में थोड़ा कम रहा। मतगणना सुबह 10 बजे से मुंबई के 23 केंद्रों पर शुरू हुई और दोपहर तक ही तस्वीर साफ हो गई. रुझानों में महायुति ने बहुमत के आंकड़े 114 सीटों को पार कर लिया. ताजा स्थिति के अनुसार BJP और शिंदे गुट की शिवसेना 130 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं, जबकि उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और महाविकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन 80–85 सीटों तक सिमटता नजर आया.
ठाकरे बनाम ठाकरे का महासंग्राम
यह चुनाव ठाकरे परिवार के भीतर राजनीतिक संघर्ष का भी प्रतीक रहा। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने पहली बार संयुक्त रैलियों के जरिए ताकत दिखाने की कोशिश की, लेकिन शिंदे फैक्टर और BJP की मजबूत संगठनात्मक मशीनरी के सामने उनका गठजोड़ असरदार साबित नहीं हो सका. एग्जिट पोल से लेकर अंतिम रुझानों तक महायुति की जीत लगभग तय मानी जा रही थी.
नेतृत्व की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस जीत को “मुंबई की जनता की महाविजय” बताते हुए कहा कि यह विकास, स्थिरता और सुशासन के प्रति जनादेश है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि नई BMC मुंबई को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर नागरिक सुविधाओं की दिशा में आगे ले जाएगी.
पहली बार BJP का मेयर, 50 हजार करोड़ के बजट पर नियंत्रण
इस जीत के साथ मुंबई को पहली बार BJP का मेयर मिलने का रास्ता साफ हो गया है. पिछले ढाई दशकों से शिवसेना के कब्जे में रही BMC अब महायुति के नियंत्रण में होगी, जिससे 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक के वार्षिक बजट पर सीधा प्रभाव पड़ेगा. सड़कें, बाढ़ प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाएं, झुग्गी पुनर्वास और सफाई व्यवस्था जैसे अहम मुद्दों पर अब नई प्रशासनिक प्राथमिकताएं तय होंगी.
विवाद और राजनीतिक संकेत
चुनाव के दौरान कुछ इलाकों में वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और स्याही से जुड़े आरोप लगे, हालांकि चुनाव आयोग ने प्रक्रिया को पारदर्शी बताया. वहीं, अरुण गवली की दोनों बेटियों की हार को मुंबई की पुरानी अपराध-राजनीति के दौर के अंत के रूप में देखा जा रहा है.
मुंबई के लिए नया अध्याय
चार वर्षों बाद चुनी हुई मेयर और स्थायी समिति के गठन से मुंबईकरों को स्थिर स्थानीय शासन मिलने की उम्मीद है. महायुति ने महिला यात्रियों के लिए बस किराया रियायत, डिजिटल सेवाओं के विस्तार और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का वादा किया है. कुल मिलाकर, यह परिणाम महाराष्ट्र में BJP की मजबूत पकड़ और ठाकरे ब्रांड के कमजोर पड़ने का स्पष्ट संकेत देता है.
मुंबई अब एक नए राजनीतिक और विकासात्मक युग में प्रवेश करती दिख रही है.