सीखो सरकार: बिना प्रदूषण और बिना भारी घाटे के—चंडीगढ़ की ई-बस सेवा बनी मिसाल, जयपुर कब लेगा सीख?

अविनाश पाराशर। हाल ही में ई- बसों का ट्रायल जयपुर में भी किया गया।

सीखो सरकार: बिना प्रदूषण और बिना भारी घाटे के—चंडीगढ़ की ई-बस सेवा बनी मिसाल, जयपुर कब लेगा सीख?

Ananya soch: Public Transport Reform

अनन्य सोच। Clean Transport: एक ओर जहां राजस्थान की राजधानी जयपुर बढ़ते प्रदूषण और घाटे में डूबती बस सेवाओं से जूझ रही है, वहीं (Chandigarh Transport) चंडीगढ़ ने इलेक्ट्रिक बसों (ई-बस) के जरिए न सिर्फ (Clean Mobility) स्वच्छ परिवहन का रास्ता चुना है, बल्कि आर्थिक सुधार की दिशा में भी बड़ा कदम बढ़ाया है। (Chandigarh Model) चंडीगढ़ की ई-बस सेवा आज देश के लिए एक मॉडल बनती जा रही है।

ई-बस सेवा: पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों में सुधार

(Electric Bus India) केंद्र सरकार की मंजूरी के तहत चंडीगढ़ को कुल 428 ई-बसें मिली हैं, जिनमें से 25 बसें सड़कों पर उतर चुकी हैं, जबकि मार्च के पहले सप्ताह तक इनकी संख्या बढ़कर 45 हो जाएगी।

इन बसों का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्चुअली किया गया था। खास बात यह है कि जहां पहले डीजल बसों के कारण प्रदूषण और खर्च दोनों बढ़ रहे थे, वहीं अब ई-बसें इस स्थिति को पलटने की दिशा में काम कर रही हैं।

ई-बस सेवा: प्रमुख आंकड़े

बिंदु विवरण
कुल स्वीकृत बसें 428
वर्तमान में संचालित 25
मार्च तक लक्ष्य 45
एक बस की कीमत ₹1.25 करोड़
चार्जिंग पर दूरी 220 किमी
प्रति किमी भुगतान ₹61
केंद्र सहायता (प्रति किमी) ₹24 (10 वर्ष तक)
चार्जिंग स्टेशन 6 (5 और प्रस्तावित)

जयपुर में योजना अधर में क्यों?

(Smart City Transport) जयपुर में वर्ष 2024-25 के तहत 150 ई-बसों के संचालन की घोषणा हुई थी। इसके अलावा 300 सीएनजी बसें भी प्रस्तावित थीं। लेकिन लंबा समय बीत जाने के बावजूद यह योजना अब तक धरातल पर नहीं उतर पाई है। इन बसों को मालवीय नगर, मानसरोवर, वैशाली नगर, सिंधी कैंप और रेलवे स्टेशन जैसे व्यस्त रूट्स पर चलाने की योजना थी, ताकि अधिकतम यात्रियों को सुविधा मिल सके और प्रदूषण कम किया जा सके। (Jaipur EV Bus Plan) हालांकि हाल ही में ई- बसों का ट्रायल जयपुर में भी किया गया। और जल्द ही जयपुर की सड़कों पर दौड़ लगाती हुई नजर आ सकती है। 

हाईटेक निगरानी: हर बस पर डिजिटल कंट्रोल

चंडीगढ़ की ई-बसों में आधुनिक तकनीक का भरपूर उपयोग किया जा रहा है—

  • जीपीएस और सीसीटीवी से 24×7 निगरानी

  • हर टिकट का ऑनलाइन रिकॉर्ड

  • कमांड सेंटर से रियल-टाइम ट्रैकिंग

  • पैनिक बटन और टू-वे कम्युनिकेशन

यह सिस्टम पारदर्शिता बढ़ाता है और भ्रष्टाचार की संभावनाओं को लगभग खत्म करता है।

दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधा

इन बसों में दिव्यांग यात्रियों के लिए पावर-ऑपरेटेड रैंप लगाए गए हैं, जिससे व्हीलचेयर उपयोगकर्ता बिना किसी सहायता के आसानी से बस में चढ़-उतर सकते हैं। साथ ही उनके लिए आरक्षित स्थान भी उपलब्ध है।तेज चार्जिंग और स्मार्ट मेंटेनेंस

ई-बसें केवल डेढ़ घंटे में फुल चार्ज हो जाती हैं और 220 किलोमीटर तक चल सकती हैं।
सेक्टर-43 में वॉशिंग यार्ड बनाया गया है, जहां मात्र 2 मिनट में बसों की सफाई हो जाती है।

यात्रियों को मिलेगा बेहतर अनुभव

  • हर 10 मिनट में बस उपलब्ध कराने का लक्ष्य

  • महिलाओं के लिए 8 पिंक सीटें आरक्षित

  • ऑटोमेटिक अनाउंसमेंट सिस्टम

  • स्टॉप की जानकारी मेट्रो की तरह

इन सुविधाओं से यात्रियों का अनुभव और भी बेहतर हो रहा है