विकसित भारत के संकल्प में विरासत संरक्षण की अहम भूमिका : राज्यपाल बागडे

महाराणा प्रताप जयंती और 1857 की क्रांति की वर्षगांठ पर आयोजित हुआ ‘शौर्यांजलि’ कार्यक्रम

विकसित भारत के संकल्प में विरासत संरक्षण की अहम भूमिका : राज्यपाल बागडे

अनन्य सोच। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि विकसित भारत का संकल्प केवल भौतिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी समृद्ध विरासत, संस्कृति और महापुरुषों के आदर्शों के संरक्षण से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि जब तक समाज अपनी गौरवशाली परंपराओं और इतिहास के प्रेरणादायी पात्रों से जुड़ा रहेगा, तब तक राष्ट्र सशक्त और आत्मनिर्भर बना रहेगा।

राज्यपाल शनिवार को द हिंदू फाउंडेशन द्वारा जयपुर के एक निजी होटल में आयोजित ‘शौर्यांजलि’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम महाराणा प्रताप जयंती और 1857 की क्रांति की वर्षगांठ के अवसर पर “विकसित भारत विरासत के आलोक में” विषय पर आयोजित किया गया।

स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को किया नमन

राज्यपाल श्री बागडे ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले महान सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने मंगल पांडे, खुदीराम बोस और अन्य क्रांतिकारियों का स्मरण करते हुए कहा कि देश के कोने-कोने में हुए आंदोलनों और संघर्षों के कारण ही भारत को स्वतंत्रता मिली। उन्होंने विश्वकवि रवीन्द्रनाथ ठाकुर की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए उनके साहित्यिक और सांस्कृतिक योगदान को भी याद किया।

महाराणा प्रताप को बताया सोलहवीं शताब्दी का महानायक

राज्यपाल ने कहा कि महाराणा प्रताप देश के पहले ऐसे महान योद्धा थे जिन्होंने मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए निरंतर संघर्ष किया और मुगलों को लगातार चुनौती दी। उन्होंने महाराणा प्रताप और उनके प्रिय अश्व चेतक से जुड़े कई प्रेरक प्रसंग साझा किए।

उन्होंने कहा कि इतिहास के कई पक्ष अभी सामने आने बाकी हैं और “अकबरनामा” में जो वर्णित है, वही सम्पूर्ण सत्य नहीं माना जा सकता। इस दौरान उन्होंने बीकानेर की किरण देवी से जुड़ा एक ऐतिहासिक प्रसंग भी साझा किया, जिसमें उन्होंने अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए साहस का परिचय दिया था।

शिवाजी और प्रताप के गौरव का किया स्मरण

राज्यपाल ने कहा कि भारत के स्वर्णिम इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जहां महाराणा प्रताप सोलहवीं शताब्दी के महानायक थे, वहीं सत्रहवीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज ने राष्ट्र गौरव को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

कार्यक्रम में हुआ अभिनंदन

कार्यक्रम में राज्यपाल ने अमित आजाद का अभिनंदन भी किया। विधायक गोपाल शर्मा ने महाराणा प्रताप के शौर्य और 1857 की क्रांति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राजस्थान की धरती सदैव राष्ट्रभक्ति और वीरता की प्रतीक रही है। वहीं फाउंडेशन के संदीप गुप्ता ने कार्यक्रम की रूपरेखा और उद्देश्य की जानकारी दी।