हर व्यक्ति तक सुलभ और त्वरित न्याय पहुंचाना सरकार का संकल्प : मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
नए आपराधिक कानूनों से भारतीय न्याय व्यवस्था को मिली नई दिशा, वर्ष 2030 तक सभी जिलों में बनेंगे साइबर पुलिस स्टेशन
अनन्य सोच। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि लोक अभियोजक न्याय व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं, जो न केवल राज्य का विधिक प्रतिनिधित्व करते हैं बल्कि न्याय, संवैधानिक मूल्यों और आमजन के अधिकारों की रक्षा में भी अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के हर नागरिक तक सुलभ, त्वरित और पारदर्शी न्याय पहुंचे तथा इसी उद्देश्य के साथ प्रदेश में संवेदनशील, प्रभावी और जनोन्मुखी कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री शनिवार को जयपुर स्थित बिड़ला ऑडिटोरियम में विधि एवं विधिक कार्य विभाग द्वारा लोक अभियोजकों एवं विशेष लोक अभियोजकों के लिए आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
नए कानून न्याय व्यवस्था को बना रहे अधिक मानवीय और आधुनिक
मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते समय और न्यायिक दृष्टिकोण के अनुरूप अधिकारियों का निरंतर प्रशिक्षण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला लोक अभियोजकों को नए आपराधिक कानूनों, साइबर अपराधों और दिव्यांगजनों से संबंधित कानूनों के प्रति अधिक जागरूक, संवेदनशील और दक्ष बनाएगी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लागू किए गए तीन नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय प्रणाली को औपनिवेशिक सोच से मुक्त कर उसे भारतीय मूल्यों और आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने की ऐतिहासिक पहल हैं। इन कानूनों में दंड के बजाय न्याय को प्राथमिकता दी गई है और आम नागरिक को केंद्र में रखा गया है। साथ ही डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस के माध्यम से न्यायिक प्रक्रिया को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और प्रभावी बनाने पर बल दिया गया है।
प्रदेश में 42 नए न्यायालय स्थापित
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार तीनों नए आपराधिक कानूनों के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध है। पुलिस एवं अभियोजन विभाग के अधिकारियों को इन कानूनों की गहन जानकारी देने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने विभिन्न जिलों में 42 नए न्यायालय स्थापित किए हैं। इनमें फलौदी, डीडवाना-कुचामन, खैरथल-तिजारा, ब्यावर, बाड़मेर, डीग, कोटपूतली-बहरोड़ और सलूंबर में जिला एवं सेशन न्यायालय स्थापित किए गए हैं। वहीं बड़ी सादड़ी और केशोरायपाटन में नियमित अतिरिक्त जिला एवं सेशन न्यायालय खोले गए हैं।
इसके अतिरिक्त झुंझुनूं, प्रतापगढ़, टोंक, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, बारां और सीकर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विशेष न्यायालय स्थापित किए गए हैं। हनुमानगढ़, सवाई माधोपुर, चूरू, बीकानेर और जोधपुर में पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत विशेष न्यायालय तथा झुंझुनूं में एनआई एक्ट के तहत विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय खोले गए हैं।
27 हजार से अधिक लोगों को मिली विधिक सहायता
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अब तक 27 हजार से अधिक लोगों को विधिक सहायता उपलब्ध करा चुकी है। वहीं राजस्थान पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत 4 हजार पीड़ितों को लगभग 85 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है।
उन्होंने बताया कि प्रदेशभर में आयोजित 1 लाख 20 हजार विधिक साक्षरता शिविरों के माध्यम से करीब 77 लाख लोग लाभान्वित हुए हैं। राज्य सरकार न्यायालय भवनों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सहित आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराकर डिजिटल न्याय प्रणाली को भी मजबूत बना रही है।
साइबर सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह सजग
मुख्यमंत्री ने कहा कि तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए राज्य सरकार साइबर सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि साइबर अपराधों की रोकथाम और जागरूकता के लिए साइबर सुरक्षा सिमुलेशन लैब की स्थापना की गई है। साथ ही ‘ऑपरेशन साइबर शील्ड’ चलाकर साइबर अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग 10 हजार साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनके माध्यम से 12 लाख से अधिक लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया।
वर्ष 2030 तक सभी जिलों में साइबर पुलिस स्टेशन
मुख्यमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि राज्य के सभी पुलिस थानों में साइबर हेल्प डेस्क स्थापित किए जा चुके हैं तथा वर्ष 2030 तक सभी जिलों में साइबर पुलिस स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही डिजिटल अरेस्ट और अन्य साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर भी स्थापित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार साइबर अपराधों के एआई आधारित विश्लेषण और साइबर हेल्पलाइन कॉल सेंटर की व्यवस्था भी विकसित करेगी, जिससे साइबर अपराधों की मॉनिटरिंग और नियंत्रण को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
दिव्यांगजनों के प्रति संवेदनशील बनने का आह्वान
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिव्यांगजन दिव्यता के प्रतीक हैं और उनके अधिकारों की रक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने लोक अभियोजकों से अपील करते हुए कहा कि वे दिव्यांगजनों से जुड़े मामलों में अधिक गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ कार्य करें।
मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी रखे विचार
विधि एवं विधिक कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार हर व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से निरंतर कार्य कर रही है।
कार्यक्रम में महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा, प्रमुख शासन सचिव राघवेंद्र काछवाल सहित बड़ी संख्या में लोक अभियोजक और अधिवक्ता उपस्थित रहे।