गजलों के सम्राट को भावभीनी श्रद्धांजलि—“दास्तान-ए-जगजीत” में यादों से भीगा जयपुर

गजलों के सम्राट को भावभीनी श्रद्धांजलि—“दास्तान-ए-जगजीत” में यादों से भीगा जयपुर

अनन्य सोच। शहर में संगीत और संवेदनाओं का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला, जब वसुंधरा मंच पर आयोजित ऑडियो-विज़ुअल प्रस्तुति “दास्तान-ए-जगजीत : कहाँ तुम चले गए” ने हर श्रोता को भाव-विभोर कर दिया। शब्द समय की इस विशेष प्रस्तुति में वरिष्ठ पत्रकार, संपादक एवं फिल्म निर्माता राजेश बादल ने ग़ज़ल सम्राट जगजीत सिंह के जीवन को कथा, चित्र और संगीत के जरिए इस तरह प्रस्तुत किया कि पूरा सभागार उनकी यादों में डूब गया। यह आयोजन केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि एक गहन शोधपरक और संवेदनशील सांस्कृतिक दस्तावेज़ के रूप में उभरा। राजेश बादल ने अपने वृत्तचित्र “विरासत” और चर्चित जीवनी “कहाँ तुम चले गए” के आधार पर जगजीत सिंह के जीवन के हर पहलू को बारीकी से प्रस्तुत किया—श्रीगंगानगर की साधारण पृष्ठभूमि से लेकर मुंबई में संघर्ष और फिर ‘ग़ज़ल सम्राट’ बनने तक की प्रेरक यात्रा ने दर्शकों को बांधे रखा। प्रस्तुति में यह विशेष रूप से रेखांकित किया गया कि जगजीत सिंह ने ग़ज़ल को सीमित महफिलों से निकालकर आम जन तक पहुंचाया। उन्होंने गिटार, वायलिन जैसे आधुनिक वाद्ययंत्रों का प्रयोग कर ग़ज़ल को नया आयाम दिया, जिससे यह और अधिक सहज, लोकप्रिय और व्यापक बनी। उनकी गायकी में शास्त्रीयता और सरलता का अद्भुत संतुलन कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा।

कार्यक्रम का भावनात्मक पक्ष तब उभरकर सामने आया, जब उनके निजी जीवन के दर्दनाक क्षणों को साझा किया गया। बेटे विवेक सिंह के असामयिक निधन के बाद उनकी आवाज़ में आई गहराई और संवेदनशीलता ने ग़ज़लों को एक नई पहचान दी। वहीं, चित्रा सिंह के साथ उनकी जोड़ी, प्रेम और साथ गाए गए गीतों की कहानियों ने दर्शकों को भावुक कर दिया। कार्यक्रम से पूर्व जवाहर कला केंद्र में ग़ज़ल गायक दिलजीत कैस की प्रस्तुति ने माहौल को और भी जगजीतमय बना दिया। इस अवसर पर विकल्प संस्था द्वारा राजेश बादल को “जगजीत सिंह सम्मान” से सम्मानित किया गया।